दीपावली पर महंगाई से परेशान दतिया के कुम्हार: ढाई गुना बढ़े मिट्टी के दाम, इलेक्ट्रिक झालरों ने घटाई बिक्री, प्रशासन से लगाई सहयोग की गुहार
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दतिया में महंगाई से परेशान कुम्हार, दीयों का कारोबार संकट में
दतिया। दीपावली पर घरों को रोशन करने वाले मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हार इस बार महंगाई से परेशान हैं। मिट्टी की बढ़ती कीमत, बिजली का खर्च और बाजार में इलेक्ट्रिक झालरों की बढ़ती मांग ने उनके पुश्तैनी कारोबार पर असर डाला है। कुम्हार समाज के रामबाबू प्रजापति ने समस्याएं बताते हुए प्रशासन से सहयोग की मांग की है।
मिट्टी की कीमत दोगुने से ज्यादा
रामबाबू प्रजापति के अनुसार, उनके परिवार में कई पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने का काम हो रहा है। पहले मिट्टी की एक ट्रॉली करीब एक हजार रुपए में मिल जाती थी, लेकिन अब इसके लिए 2 से ढाई हजार रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं।
चिन्हित जगह पर उपयोगी मिट्टी नहीं
कुम्हारों का कहना है कि काम के लिए उपयोगी मिट्टी वन विभाग के क्षेत्र में मिलती है, लेकिन वहां से मिट्टी नहीं मिल पा रही। प्रशासन ने मिट्टी के लिए जगह चिन्हित की है, लेकिन वहां भी काम लायक मिट्टी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में महंगे दाम पर मिट्टी खरीदना मजबूरी बन गया है।
बिजली खर्च ने बढ़ाई लागत
रामबाबू ने बताया कि इलेक्ट्रिक चाक मिलने से मेहनत जरूर कम हुई है, लेकिन बिजली बिल का खर्च बढ़ गया है। वहीं, बाजार में इलेक्ट्रिक झालरों और सजावटी सामान की मांग बढ़ने से मिट्टी के दीयों की बिक्री भी प्रभावित हो रही है।
परंपरा बचाने के लिए मदद की मांग
कुम्हार समाज ने प्रशासन से उचित दाम पर काम लायक मिट्टी उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन मेहनत के हिसाब से मुनाफा नहीं मिल रहा। समय रहते मदद नहीं मिली तो पीढ़ियों से चली आ रही यह पारंपरिक कला और इससे जुड़ा रोजगार प्रभावित हो सकता है।
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रामबाबू प्रजापति, कुम्हार

