MP की तीन बेटियों ने लहराया परचम: ब्लाइंड टी20 वर्ल्ड कप जीता; सुषमा-दुर्गा और सुनीता ने निभाई बड़ी भूमिका
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MP-CG डेस्क. मध्यप्रदेश की बेटियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया है। ब्लाइंड वुमन्स टी20 वर्ल्ड कप 2025 में भारतीय टीम ने नेपाल को हराकर खिताब जीता है। यह पहला ही सीजन था, जो भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में हुआ। इस ऐतिहासिक जीत में दमोह की सुषमा पटेल और बैतूल की दुर्गा येवले का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा।
दमोह जिले के करेला गांव की दृष्टिबाधित क्रिकेटर सुषमा पटेल पहले भी मध्यप्रदेश की ब्लाइंड महिला टीम की कप्तान रह चुकी हैं। हाल ही में उनका फिर चयन राष्ट्रीय टीम में हुआ और उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से भारत को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई। भारतीय टीम ने फाइनल में नेपाल को केवल 114 रन पर रोका और 12 ओवर में तीन विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

बैतूल जिले की दुर्गा येवले, जो भैंसदेही तहसील के रॉक्सी गांव की रहने वाली हैं, टीम में बतौर विकेटकीपर-बैटर शामिल थीं। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने बेहतरीन विकेटकीपिंग और स्थिर बल्लेबाज़ी से सबका ध्यान आकर्षित किया। दुर्गा के पिता मजदूर हैं और बेहद कठिन परिस्थितियों में उन्होंने ब्रेल लिपि से राजनीति विज्ञान में एमए किया। संघर्षों के बावजूद उनका जज़्बा आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गया है।
इस यादगार जीत में पिपरिया (नयागांव) की सुनीता सराठे, बैतूल जिले की दुर्गा येवले और दमोह की सुषमा पटेल। इन तीनों खिलाड़ियों ने भारत की इस शानदार जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिले के बनखेड़ी क्षेत्र के ग्राम नयागांव की रहने वाली सुनीता सराठे के परिवार में खुशी का माहौल है। सीमांत किसान परिवार से आने वाली सुनीता की इस उपलब्धि ने पूरे गांव को गर्व से भर दिया है। जीत की खबर मिलते ही ग्रामीण सुनीता के घर पहुंचे, मिठाई खिलाई और पूरे हर्षोल्लास के साथ जश्न मनाया। सुनीता की इस सफलता पर परिजनों और ग्रामीणों ने दिल से बधाई दी।

कोलंबो में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने नेपाल को 7 विकेट से हराया। सेमीफाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराया था, जबकि नेपाल ने पाकिस्तान को मात देकर फाइनल में प्रवेश किया था। प्रदेश के खेल प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता ने दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी हैं। यह पहली बार है जब महिला दृष्टिबाधित टी-20 विश्व कप आयोजित हुआ और भारत इसकी पहली विजेता टीम बना।

