GMC भोपाल के ENT विभाग की दो डॉक्टरों ने बढ़ाया कॉलेज का मान: डॉ. कीर्ति के शोध पत्र को सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति पुरस्कार, डॉ. जोशेना को मिला एच.एच. खान स्वर्ण पदक
Published:
4 min read

गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल की दो डॉक्टरों को ईएनटी कॉन्फ्रेंस में मिला सम्मान और स्वर्ण पदक।
भोपाल। गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) भोपाल के नाक, कान, गला (ENT) विभाग ने राज्य स्तर पर एक और उपलब्धि हासिल की है। उज्जैन में 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को आयोजित स्टेट कॉन्फ्रेंस ऑफ ईएनटी में GMC भोपाल की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कीर्ति वाई. के. को प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं, कॉलेज की स्नातकोत्तर छात्रा डॉ. जोशेना वर्मा को एमएस ईएनटी परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल करने पर स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
डॉ. कीर्ति को सर्वश्रेष्ठ पेपर प्रस्तुति का पुरस्कार
सीनियर कंसल्टेंट श्रेणी में डॉ. कीर्ति वाई. के. को सर्वश्रेष्ठ पेपर प्रस्तुति का पुरस्कार मिला। उनका शोध पत्र श्वास संबंधी समस्याओं के लिए राइनोप्लास्टी एवं ओपन सेप्टोप्लास्टी (Rhinoplasty and Open Septoplasty) विषय पर आधारित था।
यह अत्याधुनिक प्रक्रिया प्रदेश के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों में से केवल गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में की जा रही है। इसके माध्यम से मरीजों को सांस लेने में होने वाली परेशानी से राहत मिलने के साथ नाक की आकृति में भी सुधार किया जाता है।
डॉ. जोशेना वर्मा को मिला एच.एच. खान स्वर्ण पदक
जीएमसी की स्नातकोत्तर छात्रा डॉ. जोशेना वर्मा को एच.एच. खान स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित एमएस ईएनटी परीक्षा 2025 में पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर मिला।
यह स्वर्ण पदक एसोसिएशन ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया (AOI), मध्य प्रदेश द्वारा प्रतिवर्ष राज्य में प्रथम स्थान हासिल करने वाले विद्यार्थी को दिया जाता है। जीएमसी प्रबंधन और विभाग ने दोनों डॉक्टरों की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
राइनोप्लास्टी और ओपन सेप्टोप्लास्टी से मिलती है सांस की समस्या में राहत
चिकित्सकों के मुताबिक, श्वास संबंधी समस्याओं और नाक की बनावट को ठीक करने के लिए राइनोप्लास्टी और ओपन सेप्टोप्लास्टी महत्वपूर्ण सर्जिकल प्रक्रियाएं हैं। कई मरीजों को बेहतर सांस लेने की सुविधा और नाक के बाहरी आकार में सुधार के लिए इन प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है। जब नाक की आंतरिक बनावट और बाहरी आकार में असंतुलन होता है, तब ये सर्जरी उपयोगी साबित होती हैं।
क्या होती है Open Septoplasty?
नाक के अंदर की वह दीवार, जो दोनों नथुनों को आपस में अलग करती है, उसे नेजल सेप्टम (Nasal septum) कहा जाता है। यदि यह दीवार किसी कारणवश टेढ़ी हो जाती है, जिसे डेविएटेड सेप्टम (Deviated septum) कहा जाता है, तो मरीज को एक या दोनों नथुनों से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इस टेढ़ेपन को ठीक करने के लिए ओपन सेप्टोप्लास्टी की जाती है।
ओपन सेप्टोप्लास्टी के दौरान सर्जन दोनों नथुनों के बीच के बाहरी हिस्से पर छोटा चीरा लगाकर नाक की अंदरूनी संरचनाओं और कार्टिलेज को स्पष्ट रूप से देखते हैं। इससे जटिल रूप से टेढ़े सेप्टम को सटीकता से सीधा किया जाता है और हवा के आवागमन का रास्ता साफ करने में मदद मिलती है।
Rhinoplasty से नाक की बनावट और सांस लेने में सुधार
आमतौर पर राइनोप्लास्टी को नाक के बाहरी आकार या रूप-रंग में बदलाव की सर्जरी माना जाता है, लेकिन नाक की आंतरिक संरचना या वाल्व की समस्या के कारण सांस लेने में रुकावट होने पर इसे फंक्शनल राइनोप्लास्टी के रूप में किया जाता है। इसमें नाक के बाहरी ढांचे को मजबूत किया जाता है, ताकि सांस लेते समय अंदर का मार्ग बंद न हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी मरीज को सेप्टम के टेढ़ेपन के कारण सांस लेने में परेशानी के साथ नाक के बाहरी आकार में भी सुधार की जरूरत होती है, तो दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ सेप्टोराइनोप्लास्टी (Septorhinoplasty) के रूप में किया जाता है। इससे सांस लेने से जुड़ी शारीरिक परेशानी और नाक की बनावट से संबंधित समस्या, दोनों का इलाज किया जा सकता है।
ये भी पढ़ें- भोपाल में पहली बार एशियन वुमेंस हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी-2026: CM मोहन यादव करेंगे टूर्नामेंट का शुभारंभ

