भोपाल में PWD का अजब-गजब कारनामा! : पहले से रोशन सड़कों पर लगाई जा रही हैं अतिरिक्त लाइटें, रहवासियों ने उठाए सवाल, बोले- अंधेरे में डूबी सड़कों पर विभाग की नजर नहीं
Published:
4 min read

बाग मुगलिया एक्सटेंशन में पहले से रोशन सड़कों पर लगाई जा रही हैं अतिरिक्त लाइटें।
भोपाल। राजधानी में सरकारी विभागों के कामकाज का एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सरकारी बजट के सदुपयोग और विकास कार्यों की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बाग मुगलिया एक्सटेंशन कॉलोनी में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा पहले से लगे बिजली के खंभों और उन पर मौजूद पर्याप्त रोशनी के बावजूद अतिरिक्त लाइटें लगाई जा रही हैं। कॉलोनी में कई खंभों पर नई लाइटें लगाई जा चुकी हैं, जबकि कई स्थानों पर यह काम अब भी जारी है।
हैरानी की बात यह है कि जिन जगहों पर पहले से ही रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था है, वहां दोबारा लाइटें लगाने की आवश्यकता पर स्थानीय रहवासियों ने सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि जब मौजूदा लाइटों से सड़कें पहले से ही रोशन हैं, तो फिर अतिरिक्त लाइटों के नाम पर सरकारी धन क्यों बर्बाद किया जा रहा है?
जहां जरूरत, वहां अंधेरा; जहां रोशनी, वहां फिर लाइटें!
यह मामला सिर्फ अतिरिक्त लाइटें लगाने तक सीमित नहीं है। भोपाल के कई ऐसे इलाके हैं, जहां शाम होते ही सड़कें और कॉलोनियां अंधेरे में डूब जाती हैं। उदाहरण के लिए, लहारपुर से बरखेड़ा पठानी मार्ग पर करीब 22 साल से स्ट्रीट लाइट की समस्या बनी हुई है। वहीं, प्रधानमंडपम से 11 मील मार्ग पर भी लंबे समय से रोशनी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद, बाग मुगलिया एक्सटेंशन में नई लाइटें लगाने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है, जो अपने आप में सवालों के घेरे में है।
करीब 3 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर सवाल
इस पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड के अनुसार, बाग मुगलिया एक्सटेंशन कॉलोनी रोड पर बिजली की 33 KV और 11 KV लाइनों को शिफ्ट करने तथा LED स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य प्रस्तावित है। इस टेंडर की अनुमानित लागत करीब 2.5 करोड़ रुपये बताई गई है और इसके 24 अगस्त 2026 को अवॉर्ड होने का रिकॉर्ड भी उपलब्ध है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स में इस लाइटिंग प्रोजेक्ट पर करीब 3 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है।
रहवासियों ने जताई भ्रष्टाचार की आशंका
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग जरूरत के हिसाब से काम करने के बजाय ऐसे स्थानों पर बजट खर्च कर रहा है, जहां पहले से ही बिजली के खंभे और लाइटें मौजूद हैं। रहवासियों का सवाल है कि जब शहर के कई हिस्से अंधेरे में डूबे हैं, तो वहां लाइटें लगाने को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही? लोगों ने इस कार्य में संभावित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई है। हालांकि, फिलहाल इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि या जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
सरकारी बजट और विभाग की प्राथमिकताओं पर सवाल
भोपाल में स्ट्रीट लाइटों की बदहाली कोई नई समस्या नहीं है। अगस्त 2025 की एक रिपोर्ट में शहर की करीब 1,300 स्ट्रीट लाइटें बंद होने और चार महीनों के भीतर 1,301 शिकायतें दर्ज होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा, अप्रैल 2024 की रिपोर्ट में भी शहर की कई कॉलोनियों और सड़कों पर अंधेरे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब राजधानी के कई इलाके आज भी पर्याप्त रोशनी के इंतजार में हैं, तो बाग मुगलिया एक्सटेंशन में पहले से मौजूद व्यवस्था के बावजूद अतिरिक्त लाइटें लगाने की क्या आवश्यकता थी? क्या विभाग ने इस कार्य से पहले किसी प्रकार का सर्वे कराया था? क्या मौजूदा लाइटों और नए पोल की उपयोगिता का कोई आकलन किया गया था? अब यह जरूरी है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे प्रोजेक्ट की उच्चस्तरीय जांच कराएं और स्पष्ट करें कि जनता के कर (Tax) का पैसा किस आधार पर खर्च किया जा रहा है।
विभाग से प्रमुख सवाल
- जहां पहले से स्ट्रीट लाइटें सुचारू रूप से लगी हैं, वहां अतिरिक्त लाइटें लगाने की जरूरत किस सर्वे के आधार पर तय की गई?
- बाग मुगलिया एक्सटेंशन में चल रहे इस लाइटिंग प्रोजेक्ट की वास्तविक लागत कितनी है और इसका ठेका किस कंपनी को दिया गया है?
- क्या शहर के अंधेरे वाले इलाकों का सर्वे करवाकर वहां प्राथमिकता के आधार पर लाइटें लगाने की कोई योजना बनाई गई है?
- एक ही स्थान पर दोहरी लाइटिंग व्यवस्था से सरकारी राजकोष पर कितना अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा?
- क्या विभाग इस पूरे प्रोजेक्ट का थर्ड पार्टी ऑडिट और गुणवत्ता परीक्षण (Quality Test) कराने के लिए तैयार है?
अब सवाल यह उठता है कि क्या PWD विभाग इस मामले में अपनी जवाबदेही तय करेगा या फिर सरकारी बजट के दुरुपयोग पर उठ रहे ये सवाल यूं ही अनुत्तरित रह जाएंगे?
राघव शर्मा, रिपोर्टर

