माइनस 40 नंबर वाले कैंडिडेट्स भी डॉक्टर बन सकेंगे: NEET PG काउंसलिंग में जीरो परसेंटाइल का क्या मतलब; जानिए माइनस मार्किंग से सीट अलॉटमेंट तक पूरा प्रोसेस
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एजुकेशन डेस्क. NEET PG काउंसलिंग में क्वालीफाईंग पर्सेंटेहज कम कर दिया गया है। SC, ST और OBC कैंडिडेट के लिए कट-ऑफ जीरो परसेंटाइल या माइनस 40 नंबर तक कर दिया गया है। इसके बाद तीसरे राउंड की काउंसलिंग फिर से शुरू हो गई है। अब कैंडिडेट ये समझने में परेशान है कि कम किए हुए परसेंटाइल से क्या असर होगा और जीरो परसेंटाइल होता क्या है।
जीरो परसेंटाइल क्या होता है
जीरो पर्सेटाइल कट-ऑफ का मतलब है कि परीक्षा में क्वालीफाई करने के लिए जो परसेंटाइल पहले था, उसको अब और कम कर दिया गया है। ऐसे में बहुत कम परसेंटाइल लाने वाले कैंडिडेट भी काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे। हालांकि इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं होगा कि काउंसलिंग में बैठे सारे ही कैंडिडेट को सीट अलॉट हो ही जाएगी। काउंसलिंग के लिए एलिजिबल होना और सीट मिलना अलग-अलग बातें हैं। सीट अलॉटमेंट कैंडिडेट की रैंक, मेरिट, सिलेक्ट की हुई चॉइस और अवेलेबल सीटों की संख्या, कैटेगरी और कॉलेजों के नियमों पर डिपेंड करता है।

परसेंटाइल क्या होता है
दरअसल, परसेंटाइल किसी कैंडिडेट के प्रदर्शन की तुलना सभी दूसरे कैंडिडेट से करता है। परसेंटाइल ये दिखाता है कि उस कैंडिडेट ने कितने प्रतिशत उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसको उदाहरण के तौर पर समझते हैं, जैसे कि कोई कैंडिडेट 90वें परसेंटाइल में हैं, तो उसका मतलब ये हैं कि उस कैंडिडेट ने परीक्षा में शामिल हुए 90% कैंडिडेट से बेहतर प्रदर्शन किया है। फिर चाहे उसे कितने भी नंबर मिले हों।
परसेंटाइल कैसे कैलकुलेट करते है
परसेंटाइल को कैलकुलेट उन कैंडिडेट्स के परसेंटेज के आधार पर किया जाता है, जिन्होंने आपसे कम नंबर लाए हैं। इसके लिए कुछ पॉइंट्स को ध्यान में रखा जाता है।
- समान नंबर आने पर यानी टाई होने पर कौन ऊपर आएगा।
- रैंक कैसे लगेगी यानी क्रम तय करने का तरीका क्या होगा।
- हर शिफ्ट का अलग लेवल होगा- कुछ पेपर टफ, कुछ आसान होते हैं।
- सबको मिलाकर ही फाइनल परसेंटाइल निकालते हैं।
-40 क्या होता है
NEET PG परीक्षा में सभी क्वेश्चन मल्टीपल चॉइस होते है। इसमें सही जवाब देने पर कैंडिडेट को 4 नंबर मिलते हैं और गलत जवाब देने पर 1 मार्क्स की नेगेटिव मार्किंग होती है। इसी के साथ बिना जवाब दिए हुए क्वेश्चन पर जीरो मार्क्स मिलते हैं। अब ऐसे में जब किसी कैंडिडेट के गलत आंसर्स की संख्या सही जवाब के आंसर से काफी ज्यादा होती है, तो ऐसी सिचुएशन में स्कोर माइनस में चला जाता है।

एक उदाहरण से समझिए
यदि किसी कैंडिडेट ने 10 सही आंसर दिए: 10 × 4 = 40 मार्क्स।
लेकिन यदि उसने 80 गलत आंसर दिए: 80 × 1 = –80 मार्क्स।
ऐसी स्थिति में टोटल स्कोर होगा: 40 – 80 = माइनस 40 मार्क्स।
परसेंटेज क्या होता है
परसेंटेज यह बताता है कि किसी कैंडिडेट ने परीक्षा के टोटल मार्क्स में से कितने नंबर हासिल किए हैं। जैसे कि NEET-PG परीक्षा 800 मार्क्स की होती है। वहीं किसी कैंडिडेट को 320 नंबर मिलते हैं, तो उसका परसेंटेज 40% होगा। परसेंटेज केवल पर्सनल स्कोर को बताता है और इसमें यह नहीं देखा जाता कि बाकी कैंडिडेट्स का प्रदर्शन कैसा रहा।

