Peace Deal पर बातचीत के बीच भड़की जंग: अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया, IRGC का जवाब- हमने भी US मिलिट्री बेस तबाह कर दिए; फिर से क्यों सुलगी चिंगारी
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तस्वीर अरब सागर में तैनात अमेरिकी वॉरशिप USS George H.W. Bush की है।
इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका ने शुक्रवार (26 जून) को होर्मूज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ये कार्रवाई एक दिन पहले ईरान द्वारा एक कमर्शियल शिप पर किए गए ड्रोन हमले के जवाब में की गई।
CENTCOM ने बताया कि अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज के साथ-साथ तटों से लगी हुई रडार साइटों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने कहा कि कमर्शियल जहाजों पर ईरान का हमला सीजफायर का उल्लंघन है। हमले का एक वीडियो भी CENTCOM ने जारी किया है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के जवाब में उसने भी इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिकी सेना ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने CNN से बातचीत में कहा है कि अमेरिका-ईरान के बीच इस हालिया गोलीबारी का मतलब यह नहीं कि इनके बीच बड़े पैमाने पर युद्ध फिर से शुरू हो गया है।

ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटे बाद हुआ हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के ड्रोन हमले को सीजफायर समझौते का मूर्खतापूर्ण उल्लंघन बताया था। उन्होंने कहा था कि ईरान ने कम से कम चार ड्रोन कार्गो जहाजों की ओर भेजे, जिनमें से एक ड्रोन एक बड़े और महंगे मालवाहक जहाज के ऊपरी हिस्से से टकराया।
ट्रंप के मुताबिक, जहाज को नुकसान जरूर पहुंचा, लेकिन वह अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा। अमेरिका ने बाकी तीन ड्रोन रास्ते में ही मार गिराए। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान को इसका जवाब दिया जाएगा, तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा- आपको जल्द ही पता चल जाएगा। बाद में अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर इस बयान को अमल में बदल दिया।

यह हमले ऐसे वक्त में हुए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते के बाद होर्मूज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बहाल करने की कोशिशें चल रही थीं। हालांकि, दोनों देशों के बीच इस बात पर मतभेद बना हुआ है कि यहां से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूला जाए या नहीं।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह समुद्री गलियारा पूरी तरह आजाद और टोल-फ्री रहेगा, जबकि ईरान का दावा है कि उसे यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल लेने का अधिकार है।

