यूरोप में Doomsday की तैयारी: घर में 72 घंटे का राशन रखने की सलाह, जानिए सरकारों को किस बात का डर
Published:
6 min read

यूरोप के कई देशों में लोगों से 72 घंटे का खाना, पानी और जरूरी सामान रखने को कहा जा रहा है।
इंटरनेशनल डेस्क। यूरोप के कई देशों में लोगों से कहा जा रहा है कि वे घर पर खाने-पीने की चीजों और जरूरी सामान का स्टॉक रखें। सलाह है कि हर परिवार के पास इतना सामान हो कि बिजली, पानी और फोन-इंटरनेट बंद होने पर भी वह कम से कम तीन दिन यानी 72 घंटे तक गुजारा कर सके। यह सलाह ऐसे समय दी जा रही है, जब यूरोप में रूस-यूक्रेन जंग, साइबर अटैक और सिक्योरिटी से जुड़े खतरों को लेकर चिंता बनी हुई है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सरकारों को किसी बड़े जंग या तबाही की पक्की जानकारी मिल गई है। 72 घंटे की तैयारी का मकसद किसी एक खतरे से निपटना नहीं है। यह ऐसी व्यवस्था है, जिससे बाढ़, तूफान, जंगलों में आग, महामारी, बिजली गुल होने या साइबर अटैक जैसी किसी भी स्थिति में लोग शुरुआती समय खुद संभाल सकें।
यूराेपियन यूनियन ने पेश की थी स्ट्रैटेजी
यूरोपियन यूनियन ने मार्च 2025 में प्रिपेयर्डनेस यूनियन स्ट्रैटेजी (Preparedness Union Strategy) पेश की थी। इसमें लोगों को कम से कम 72 घंटे तक अपनी जरूरतें खुद पूरी करने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई। यूरोपियन कमीशन के मुताबिक, दुनिया में खतरे बढ़ रहे हैं। इनमें जंग और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के अलावा साइबर अटैक, जरूरी सेवाओं के सिस्टम में सेंध, गलत इनफॉर्मेशन और प्राकृतिक आपदाएं भी शामिल हैं। कोरोना महामारी के दौरान भी कई देशों ने सप्लाई में रुकावट का सामना किया था।

72 घंटे ही क्यों तय किए गए
किसी बड़े संकट के बाद सरकारी एजेंसियों को हर प्रभावित शख्स तक तुरंत पहुंचने में समय लग सकता है। सड़कें बंद हो सकती हैं। बिजली और पानी की सप्लाई बहाल करने में वक्त लग सकता है। ऐसे में अगर लोग शुरुआती तीन दिन अपनी जरूरतें खुद पूरी कर सकें, तो रेस्क्यू और रिलीफ टीमें सबसे ज्यादा जरूरत वाले लोगों पर ध्यान दे सकती हैं।

फिनलैंड की सरकार भी लोगों को कम से कम 72 घंटे की तैयारी रखने की सलाह देती है। वहां की ऑफिशियल गाइडलाइन के मुताबिक, यह समय एडमिनिस्ट्रेशन को हालात संभालने और कमजोर लोगों तक मदद पहुंचाने का मौका देता है। डेनमार्क में भी लोगों से कहा गया है कि वे तीन दिन तक घर पर रहकर अपनी जरूरतें पूरी करने लायक सामान रखें।
हर देश में 72 घंटे का नियम नहीं
यूरोप के सभी देशों में तैयारी की अवधि एक जैसी नहीं है। स्वीडन में लोगों को कम से कम एक हफ्ते तक अपनी जरूरतें खुद पूरी करने की तैयारी रखने को कहा गया है। वहां की सिविल डिफेंस एजेंसी के मुताबिक, 72 घंटे की तैयारी भी मददगार है, लेकिन एक हफ्ते का सामान रखना बेहतर है।

जर्मनी में भी नागरिक सुरक्षा एजेंसी लोगों को करीब 10 दिन तक खुद के लिए जरूरी सामान जुटाने की सलाह देती है। हालांकि, एजेंसी का कहना है कि शुरुआत में कम से कम तीन दिन का स्टॉक भी उपयोगी है। फ्रांस में सरकार ने 72 घंटे का इमरजेंसी किट तैयार रखने की सलाह दी है। इसमें पानी, बिना पकाए खाया जा सकने वाला खाना, दवाएं और जरूरी दस्तावेज शामिल हैं।
घर में कौन-कौन सी चीजें रखनी चाहिए
सरकारों की सलाह के मुताबिक, सबसे पहले पीने का पानी और लंबे समय तक खराब न होने वाला खाना रखना चाहिए। ब्रिटेन की कुछ लोकल एडमिनिस्ट्रेटिव गाइडलाइन में हर शख्स के लिए रोजाना करीब 2.5 से 3 लीटर पानी रखने की सलाह दी गई है। इसके अलावा डिब्बाबंद खाना, सूखे मेवे, बिस्कुट और ऐसा भोजन रखा जा सकता है जिसे पकाने की जरूरत न पड़े।

घर में टॉर्च, एक्स्ट्रा बैटरी, पावर बैंक और बैटरी से चलने वाला रेडियो भी होना चाहिए। बिजली और इंटरनेट बंद होने पर रेडियो से सरकारी निर्देश और जरूरी जानकारी मिल सकती है। इसके साथ जरूरी दवाएं, फर्स्ट एड किट, कैश, आइडेंटिटी कार्ड और अहम डॉक्यूमेंट्स की कॉपी भी सुरक्षित रखनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और पालतू जानवरों की जरूरतों का सामान भी इसमें शामिल होना चाहिए।
जंग और साइबर अटैक की चिंता भी वजह
यूरोप में इस तैयारी के पीछे सुरक्षा से जुड़े खतरे भी हैं। रूस-यूक्रेन जंग के बाद यूरोपीय देशों में यह चिंता बढ़ी है कि किसी कॉनफ्लिक्ट का असर इलेक्ट्रिसिटी, कम्युनिकेशपन, ट्रांसपोर्ट और दूसरी जरूरी सेवाओं पर पड़ सकता है। साइबर अटैक या किसी अहम ढांचे को नुकसान पहुंचने से भी रोजमर्रा की सेवाएं ठप हो सकती हैं।
यूरोपियन कमीशन ने अपनी स्ट्रैटेजी में इन खतरों का जिक्र किया है। इसमें अस्पतालों, स्कूलों, ट्रांसपोर्ट और टेलीकॉम जैसी जरूरी सर्विस को क्राइसिस के दौरान चालू रखने की तैयारी पर भी जोर दिया गया है।

क्या आम लोगों को घबराने की जरूरत है
सरकारों की सलाह को किसी जंग या तबाही का अलर्ट मानना सही नहीं होगा। यह पहले से तैयारी रखने की सलाह है। इसका मकसद यह है कि किसी अनहोनी की स्थिति में लोग पूरी तरह सरकारी मदद पर निर्भर न रहें। हालांकि, हर परिवार की जरूरत और आर्थिक स्थिति अलग होती है। इसलिए एक साथ बहुत सारा सामान खरीदने के बजाय रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान थोड़ा एक्स्ट्रा सामान रखना भी तैयारी का तरीका हो सकता है।
किन बातों का ध्यान रखना जरूरी
इन तैयारियों में कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है, जैसे इमरजेंसी किट में रखा सामान समय-समय पर जांचना जरूरी है। खाने-पीने की चीजों की एक्सपायरी डेट देखें और दवाओं को जरूरत के मुताबिक बदलें। अगर खाना गर्म करने के लिए गैस या बिजली उपलब्ध न हो, तो सुरक्षित विकल्प पहले से सोचें। बंद कमरे में कोयले की अंगीठी, बारबेक्यू या जनरेटर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे जहरीली गैस का खतरा हो सकता है।

कुल मिलाकर, 72 घंटे का राशन रखने की सलाह Doomsday की तैयारी से ज्यादा इमरजेंसी में खुद को संभालने की प्लानिंग है। सरकारें चाहती हैं कि संकट आने पर शुरुआती तीन दिन लोग अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें। इससे सरकार को राहत और बचाव का काम करने के लिए जरूरी समय मिल सकेगा।

