16 साल बाद पोलिश PM की इंडिया विजिट: पगड़ी पहनकर डांस का वीडियो; ड्रोन से सैटेलाइट टेक तक बनी बात, सीक्रेट इन्फॉर्मेशन भी शेयर करेंगे
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भारत-पोलैंड डिफेंस, सैटेलाइट, क्रिटिकल मिनरल्स और सीक्रेट इन्फॉर्मेशन की सिक्योरिटी बढ़ाने पर राजी हुए हैं।- फाइल फोटो
इंटरनेशनल डेस्क। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक इंडिया के ऑफिशियल विजिट पर पहुंचे थे। यह 16 साल बाद किसी पोलिश प्रधानमंत्री की इंडिया विजिट थी। टस्क इससे पहले 2010 में भारत आए थे। इस बार वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर करीब 100 CEO और ट्रेड रेप्रेजेंटेटिव्स के साथ पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बेंगलुरु से दिल्ली तक कई हाईलेवल मीटिंग्स की। जाते-जाते उन्होंने इंडिया विजिट को एक बेहद सफ बताया।
यह महज एक फॉरेन विजिट नहीं है बल्कि दोनों देशों के बीच, डिफेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर साझेदारी बढ़ाने का रास्ता तैयार करने वाला हुआ। हथियारों के साथ ही अब पोलैंड हमारे साथ सीक्रेट इन्फॉर्मेशन भी शेयर करने के लिए राजी हो गया है। कुल 13 समझौते हुए हैं। यहां जानते हैं कि पोलिश PM के इंडिया विजिट के मायने क्या...
पहले एक दिलचस्प वाकया
टस्क का एक बेहद दिलचस्प वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह ताजमहल के सामने पगड़ी पहनकर डांस करते और कुकी खाते नजर आ रहे हैं। हालांकि,यह वीडियो AI जेनरेटेड है, टस्क ने खुद अपने ऑफिशियल प्लेन में बैठकर इस वीडियो दिखाया और इसकी सच्चाई बताई। टस्क ने कहा- इस पर सच में हंसा जा सकता है, लेकिन मैं आपको बता दूं कि इंडिया विजिट एकदम सही शॉट यानी बेहद सफल रही है। साथ ही कहा-पगड़ियों पर हंसिए मत, यह उनके लिए बेहद अहम है।
डोनाल्ड टस्क ने अपने ऑफिशियल प्लेन से वीडियो जारी कर इंडिया विजिट को बेहद सफ बताया।
16 साल में बदले दोनों देशों के हालात
यह पहला मौका नहीं है जब डोनाल्ड टस्क इंडिया विजिट पर पहुंचे हों। वह 2010 में भी भारत आए थे। हालांकि, उस समय पोलैंड और भारत दोनों के हालात अलग थे। बदलते ग्लोबल ऑर्डर के साथ इंडिया और पोलैंड दोनों को एक दूसरे की जरूरत है। पोलैंड G-20 में शामिल होना चाहता है। वहीं, भारत दुनिया की तीसरी बड़ी इकोनॉमी बनने के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

टस्क ने हैदराबाद हाउस में मोदी के साथ जॉइंट कॉन्फ्रेंस में स्पीच देते हुए तारीफ में कहा- आप जैसे शख्स, जो भारत जैसे पावरफुल देश को लीड कर रहे हैं, हम सबके लिए उम्मीद की किरण हैं। मुझे बहुत गर्व है कि मैं खुद को आपका दोस्त कह सकता हूं। मोदी ने भी टस्क की तारीफ की। उन्होंने कहा- मुझे उम्मीद है कि हम दोनों भारत-पोलैंड के रिश्ते को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
डिफेंस कोऑपेशन को खास अहमियत
- पोलिश मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मेड इन पोलैंड हथियारों का भी इस्तेमाल हुआ था। अब दोनों देशों ने तय किया है डिफेंस सेक्टर में काम करने वाले ऑफिसर्स और ग्रुप रेगुलर कॉन्टैक्ट में रहेंगे।
- इंडिया-पोलैंड की डिफेंस सेक्टर की इंडस्ट्रीज के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन कायम किया जाएगा। इसके लिए डिफेंस इंडस्ट्री डायलॉग बनाने का प्रपोजल भी रखा गया है।इसके जरिए कंपनियां मिलकर हथियार और डिफेंस इक्विपमेंट बनाने, टेक्नोलॉजी शेयर करने और नए प्रोजेक्ट पर काम करने के रास्ते तलाश सकेंगी।

- पोलैंड की कंपनी WB Group पहले से भारतीय बाजार में मौजूद है। अब पोलैंड की कई कंपनियों इंडियन मार्केट में उतरेंगी। खास फोकस डिफेंस इंडस्ट्री पर होगा। दोनों देशों ने 2030 तक आपसी ट्रेड दोगुना करने का टारगेट सेट किया है।
इंडिया-पोलैंड शेयर करेंगे सीक्रेट इन्फॉर्मेशन
- पोलैंड अब इंडिया के साथ सीक्रेट इन्फॉर्मेशन भी शेयर करने के लिए राजी हो गया है। दोनों देशों ने Mutual Protection and Exchange of Classified Information समझौता साइन करने की इच्छा जताई है।
- इसका मकसद ऐसी सीक्रेट जानकारी को सिक्योर रखने के नियम तय करना है, जिसे डिफेंस या टेक्निकल कोऑपरेशन के दौरान शेयर किया जा सकता है। दोनों देश साइबर सिक्योरिटी और नई डिफेंस टेक्नोलॉजी पर भी साथ काम करना चाहते हैं।
बात सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं
- दोनों देशों ने सैटेलाइट, स्पेस टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी में भी मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई है।
- टस्क ने बेंगलुरु में स्पेस और IT सेक्टर से जुडे ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव्स से मुलाकात की। पोलैंड की स्पेस एजेंसी और इस सेक्टर की कंपनियों के रिप्रेजेंटेटिव भी उनके साथ थे। दोनों देशों सैटेलाइट और मॉर्डन टेक्नाेलॉजी का इस्तेमाल डिफेंस, कम्युनिकेशन, मौसम की जानकारी और आपदा प्रबंधन जैसे सेक्टर्स में साथ काम करेंगे।
क्रिटिकल मिनरल्स- रेयर अर्थ पर भी फोकस
- क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ भी इस विजिट के अहम मुद्दों में शामिल रहे। इन मिनरल्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और कई न्यू एज टेक्नोलॉजी में होता है। भारत और पोलैंड ने माइनिंग, रेयर अर्थ को रिफाइन करने और बैटरियों को रिसाइकिल करने में एक दूसरे का साथ देने की बात की।
- क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर भी बातचीत चल रही है। कारोबार के मोर्चे पर दोनों प्रधानमंत्रियों ने 2030 तक ट्रेड दोगुना करने का लक्ष्य रखा। इसके लिए डिफेंस, दवाइयों, मशीनरी, एनर्जी, माइनिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में कारोबारी साझेदारी बढाने की बात कही गई है।
आखिर, क्यों करीब आ रहे इंडिया-पोलैंड
भारत और पोलैंड के रिश्तों में इस बदलाव के पीछे दोनों देशों की जरूरतें भी हैं। पोलैंड यूरोप में भारतीय कंपनियों के एक्सपेंशन का रास्ता बन सकता है, जबकि भारत पोलिश कंपनियों को बड़ा मार्केट और मैन्युफैक्चरिंग का मौका दे सकता है।
पोलैंड यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में सुधार और भारत की परमानेंट मेंबरशिप की मांग को भी सपोर्ट किया है। हालांकि, अब असली चुनौती इन अनाउंसमेंट्स को हकीकत में बदलने की होगी।
सीक्रेट इन्फॉर्मेशन शेयर करने का समझौता, डिफेंस कंपनियों की साझेदारी और स्पेस टेक्नोलॉजी में जॉइंट प्रोजेक्ट शुरू करने के लिहाज से यह विजिट बेहद पॉजिटिव साबित हुई है। अगर दोनों देश इन पर समय से काम करते हैं, तो डेढ़ दशक बाद पोलिश PM की यह विजिट डिफेंस और टेक्नोलॉजी के सेक्टर में रिश्तों के लिहाज से अहम साबित होगी।

