आजादी के 79 साल: लोगों की उम्र डबल हुई, साक्षरता दर 4 गुना और फूड प्रोडक्शन 900% बढ़ा; 18 पैमानों से जानें 1947 में कहां थे और अब कहां पहुंचे
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तस्वीर एक जनवरी 1950 की है। ओडिशा के एक गांव में WHO-UNICEF मलेरिया कंट्रोल टीम DDT पाउडर स्प्रे करने की तैयारी कर रही है। उस दौर में मलेरिया से सालाना लाखों लोगों की मौत हो जाया करती थी। भारत सरकार ने 1953 में जो मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चलाया, उसके बाद इस बीमारी से होने वाली मौतों पर विराम लग सका। (फोटो सोर्स:UN Photo)
नेशनल डेस्क। ‘भविष्य आराम करने का नहीं है। हमें निरंतर मेहनत करनी है। हमें उन संकल्पों को पूरा करना है, जो हमने लिए थे। हमें करोड़ों पीड़ितों की सेवा करनी है। इसका मतलब है कि गरीबी, भेदभाव, अज्ञान और बीमारियों को खत्म करना है।’ यह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के भाषण का एक अंश है, जो उन्होंने आजादी मिलने के वक्त यानी 14 अगस्त 1947 को आधी रात में दिया था।
दरअसल, देश को जब आजादी मिली तब हालात ठीक नहीं थे। फसलों की पैदावार कम थी। स्कूल-कॉलेज के साथ-साथ अस्पताल भी सीमित थे। यही कारण था कि साक्षरता दर और लोगों की औसत उम्र भी बेहद कम थी। ज्यादातर गांवों में बिजली नहीं थी और सड़कों का नेटवर्क भी पर्याप्त नहीं था।
बीते 8 दशक में ऐसे हर विभाग पर काम हुआ और नतीजा यह है कि भारत आज एक सशक्त राष्ट्र के तौर पर उभरा है। अब हम आर्थिक रूप से स्थिर हैं और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे तमाम क्षेत्रों में अच्छी सुविधाएं हैं। कहने का मतलब यह है कि 1947 से लेकर 2025 तक के इस सफर में बहुत कुछ हासिल किया गया है। हालांकि कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जहां अब भी सुधार की गुंजाइश है। इस खबर में हम 79 साल पहले के भारत और आज के भारत की ही तुलना कर रहे हैं…
फूड प्रोडक्शन: भारत में 1950-51 में 50.82 मिलियन टन अनाज का उत्पादन होता था। 2021-22 में यह 315 मिलियन टन पर पहुंच गया। यानी अनाज उत्पादन 6 गुना हो गया। इसी के साथ 1950-51 में जो टोटल फूड प्रोडक्शन 106 मिलियन टन था, वो 2022 आते-आते करीब 9 गुना होकर 936 मिलियन टन पर पहुंच गया। यह सब 60-70 के दशक में शुरू हुई हरित क्रांति के चलते संभव हुआ। उस दौर में बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाएं शुरू हुईं और उन्नत आनुवंशिकी बीज का उपयोग करने से लेकर फसलों की पैदावार बढ़ाने के कई विकल्प तलाशे गए। (सोर्स: नीति आयोग)

बिजली: 1947 तक भारत में 1362 मेगावॉट बिजली उत्पादन की क्षमता थी। 1950 तक केवल 3061 गांवों तक ही यह पहुंच पाई थी। अप्रैल 2018 तक सभी गांव (5,97,464) में बिजली पहुंचा दी गई। हालांकि कई खबरें ऐसी आती रही हैं जिनमें कई गांवों में बिजली नहीं होने के दावे किए गए हैं। कई ऐसे भी गांव हैं जहां बिजली पहुंची तो है लेकिन दिन में कुछ ही घंटे चालू रहती है। इस विभाग में और सुधार की जरूरत है। (सोर्स: सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी)
रेल नेटवर्क: आजादी के बाद भारत के हिस्से में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया 77 हजार किलोमीटर ट्रैक (53,596 किमी रूट लेंथ) आया था। अब कुल ट्रैक लेंथ 1.26 लाख किलोमीटर (67,956 किमी रूट लेंथ) हो चुका है। (सोर्स: रेल मंत्रालय)
हाईवे: 1950 तक भारत में 21,378 किलोमीटर नेशनल हाईवे था। कुल 4 लाख किलोमीटर सड़कें बनी हुई थीं। 2025 तक नेशनल हाईवे की लंबाई 1.46 लाख किलोमीटर और कुल रोड नेटवर्क 66.71 लाख किलोमीटर पहुंच चुका है। (सोर्स: PIB)
साक्षरता दर: आजादी के बाद 1951 की जनगणना के साथ ही साक्षरता दर का पहला आंकड़ा आया। तब यह 18.32% थी। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की साक्षरता दर तो 5 फीसदी भी नहीं थी। आजादी के बाद शिक्षा पर फोकस करते हुए सरकार ने गांव-गांव में स्कूल खुलवाए। इसका नतीजा यह हुआ कि 2011 की जनगणना में साक्षरता दर 73% तक पहुंच गई। ग्रामीण महिलाओं में भी साक्षरता दर 58 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। वर्ल्ड बैंक के अनुमान के मुताबिक, भारत में अब साक्षरता दर 77% है। (सोर्स: जनगणना 1951,2011, वर्ल्ड बैंक)

स्कूलों की संख्या: 1947 में भारत में कुल 1.40 लाख स्कूल थे। 2024 तक यह संख्या 14.71 लाख पहुंच चुकी है। इनमें 24.80 करोड़ स्टूडेंट हैं। करीब 98 लाख तो शिक्षक ही हैं। एक रोचक बात यह भी है कि महिला शिक्षकों की संख्या पुरुषों से ज्यादा हैं। (सोर्स: PIB, शिक्षा मंत्रालय)
उच्च शैक्षणिक संस्थान: आजादी के वक्त भारत में महज 17 यूनिवर्सिटी और 636 कॉलेज थे, जहां 2.38 लाख छात्र पढ़ते थे। आठ दशकों में इस संख्या में आश्चर्यजनक इजाफा हुआ है। उच्चतर शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 तक भारत में 1168 यूनिवर्सिटी और 45,473 कॉलेज चल रहे थे। छात्रों की संख्या 4.33 करोड़ थी और शिक्षक की संख्या करीब 16 लाख तक पहुंच चुकी थी। (सोर्स: PIB, शिक्षा मंत्रालय)
IIT और IIM: आजादी के बाद 1950 तक केवल एक IIT था। मई 1950 में पश्चिम बंगाल के हिजली डिटेंशन कैंप को IIT में बदला गया था। यही बाद में IIT खड़गपुर कहलाया। डेवलपमेंट के लिहाज से वैज्ञानिकों और उन्नत तकनीक की जरूरत को समझते हुए इसे शुरू किया गया था। साल दर साल इनकी संख्या बढ़ती गई और अब देश में कुल 23 IIT हो चुके हैं।
इसी तरह IIM की शुरुआत भी देश के आर्थिक विकास को पंख देने के लक्ष्य के साथ की गई। 1961 में कलकत्ता और अहमदाबाद में IIM खुले। इसके बाद लगातार इनकी संख्या भी बढ़ाई जाती रही। वर्तमान में देश में कुल 21 IIM हो चुके हैं।
IIT और IIM राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित किए जा चुके हैं। IIT के लिए 1961 में और IIM के लिए 2017 में एक्ट बनाया गया है। यह दोनों संस्थान इन्हीं एक्ट के जरिए रेगुलेट होते हैं।
औसत उम्र: 1950 के दशक में भारतीयों की औसत उम्र महज 32 साल थी। दरअसल, उस दौर में कई बीमारियों का इलाज ही नहीं था। भारत में हॉस्पिटल की कम संख्या और कुपोषण भी एक समस्या थी। साल दर साल स्थिति बेहतर होती गई और अब भारत में लोगों की आयु 67 साल से ज्यादा हो चुकी है। यह आंकड़ा 2021 का है। (सोर्स: WHO रिपोर्ट 2021)

बजट: फरवरी 1948 में देश का पहला फुल बजट पेश हुआ। इसमें वित्त वर्ष 1948-49 के लिए केंद्र सरकार की इनकम 230.52 करोड़ और खर्च 257.37 करोड़ रहने का अनुमान लगाया गया। यानी वित्तीय घाटा 26.85 करोड़ अनुमानित रहा। साल 2026 में पेश हुए बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार की इनकम 36.5 लाख करोड़ और खर्च 53.5 लाख करोड़ रुपए अनुमानित है। वित्तीय घाटा 16.96 लाख करोड़ रुपए रह सकता है। यानी 1948 की तुलना में इनकम 1500, खर्च 1900 और वित्तीय घाटा 5800 गुना बढ़ गया। (सोर्स: वित्त मंत्रालय)
GDP: 1947 में भारत की GDP को लेकर अलग-अलग थ्योरी हैं। एक अनुमान के मुताबिक, यह 2.7 लाख करोड़ रुपए थी। 2026 में खत्म हुए वित्त वर्ष में यह 3.92 ट्रिलियन डॉलर (346 लाख करोड़ रुपए) पहुंच गई। यानी GDP में कुल 125 गुना इजाफा हो गया। (सोर्स: PIB)
GDP per Capita: इसे लेकर भी अलग-अलग थ्योरी हैं। एक थ्योरी के मुताबिक, 1947 में भारत की GDP पर कैपिटा (प्रति व्यक्ति GDP में योगदान) 2400 डॉलर (7,500 रुपए) थी। दरअसल, तब डॉलर के मुकाबले रुपए की मजबूती आज की तरह कमजोर नहीं थी। तब एक डॉलर की कीमत 3.31 रुपए हुआ करती थी। 2025 में GDP पर कैपिटा 2812 डॉलर (2.48 लाख रुपए) हो गई। यानी डॉलर के हिसाब से देखा जाए तो आजादी के बाद के इन आठ दशक में जीडीपी पर कैपिटा में कोई खास इजाफा नहीं हो पाया। (सोर्स: IMF)

एक्सपोर्ट-इंपोर्ट और व्यापारिक घाटा: 1950-51 में भारत का एक्सपोर्ट 606 करोड़ (डॉलर की कीमत 5 रुपए) और इंपोर्ट 608 करोड़ था। यानी तब भारत का व्यापारिक घाटा महज 2 करोड़ रुपए था। सात दशकों में भारत ने एक्सपोर्ट तो खूब बढ़ाया लेकिन इंपोर्ट भी बढ़ता चला गया। 2025-26 में एक्सपोर्ट 39 लाख करोड़ और इंपोर्ट 68 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यानी अब व्यापारिक घाटा 29 लाख करोड़ हो गया। (सोर्स: वस्त्र मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय)
जनसंख्या: आजादी के बाद पहली जनगणना फरवरी 1951 में हुई। तब भारत की जनसंख्या 36.10 करोड़ थी। इसमें सिक्किम और जम्मू-कश्मीर की संख्या शामिल नहीं है। आखिरी जनगणना 2011 में हुई। तब जनसंख्या 121.8 करोड़ थी। एक अनुमान है कि वर्तमान में भारत की जनसंख्या 145 करोड़ के आसपास है। यानी आजादी के बाद भारत की जनसंख्या चार गुना हो चुकी है। (सोर्स: जनगणना 1951, 2011, वर्ल्ड बैंक)
महिला-पुरुष अनुपात: पुरुष-महिला अनुपात कम हुआ है। 1951 में यह 1: 0.946 था जो 2011 में 1: 0.940 हो गया। यानी पहले 1000 पुरुष पर 946 महिला का अनुपात था, 2011 में यह घटकर 940 तक आ गया। महिलाओं का कम होता अनुपात अच्छा संकेत नहीं है। (सोर्स: जनगणना 1951, 2011)
बेरोजगारी दर: आजादी के बाद पहली बार बेरोजगारी दर का डाटा 1956 में मिलता है। तब यह 2.6% थी। यानी हर 200 लोगों में 5 लोगों के पास कामकाज नहीं था। 1972 तक सरकार बेरोजगारी दर के लिए विस्तृत सर्वे नहीं करती थी। 1972 के बाद यह होने लगा। हालांकि यह हर साल नहीं होता था। साल 2008 के बाद से यह नियमित तौर पर हो रहा है। अप्रैल 2025 से हर महीने बेरोजगारी दर का डाटा आ रहा है। बीते जून में यह 5.5% रही। यानी आजादी के बाद बेरोजगारी दर दोगुनी हो गई है। (सोर्स: नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस, इकोनॉमिक सर्वे)

भुखमरी: 1947 और उसके दशकों बाद तक दुनिया के मुकाबले भारत में भुखमरी कितनी थी और कुपोषण के कारण कितनी मौतें होती थी, इसका डाटा तो नहीं है लेकिन साल 2000 के बाद से ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) ने इसे कवर करना शुरू किया। साल 2024 की GHI रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भुखमरी गंभीर स्थिति में है। 127 देशों की इस लिस्ट में भारत 105 वें स्थान पर है। यहां अब भी 13% से ज्यादा लोग कुपोषित हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें अभी भी भारत में बहुत काम होना बाकी है। (सोर्स: ग्लोबल हंगर इंडेक्स)

