CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग कंट्रोवर्सी: तीन स्टूडेंट्स ने सिस्टम की पोल कैसे खोली, बोर्ड को क्यों माननी पड़ी खामियां; कब-क्या हुआ और अब आगे क्या
Published:
5 min read

नेशनल डेस्क। CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट के बाद शुरू हुआ ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। शुरुआत कुछ स्टूडेंट्स की शिकायतों से हुई, लेकिन धीरे-धीरे मामला आंसर शीट्स की अदला-बदली, साइबर सिक्योरिटी की खामियों और टेंडर प्रक्रिया तक पहुंच गया। आखिरकार CBSE को यह मानना पड़ा कि उसके सर्विस प्रोवाइडर द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे OnMark पोर्टल में कुछ कमजोरियां थीं।
इस पूरे मामले में तीन स्टूडेंट्स की भूमिका सबसे खास रही। इन स्टूडेंट्स ने अलग-अलग लेवल पर ऐसे सवाल उठाए, जिनके बाद CBSE को जवाब देना पड़ा और सिस्टम की जांच शुरू करनी पड़ी।
आखिर क्या है पूरा मामला?
CBSE ने इस साल 12वीं की आंसर शीट्स की जांच के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया। यानी कॉपियों को डिजिटल फॉर्म में बदलकर एग्जामिनर्स को ऑनलाइन जांच के लिए भेजा गया। स्टूडेंट्स भी अपनी आंसर शीट को ऑनलाइन देख सकते थे।
रिजल्ट आने के बाद जब स्टूडेंट्स ने आंसर शीट की कॉपी देखने के लिए अप्लाई किया, तब कुछ स्टूडेंट्स ने दावा किया कि उन्हें जो कॉपी दिखाई गई, वह उनकी है ही नहीं। यहीं से विवाद शुरू हुआ।

सबसे पहले वेदांत ने उठाया सवाल
दिल्ली के 12वीं के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि CBSE ने उन्हें जो फिजिक्स की आंसर शीट दिखाई है, वह उनकी नहीं है।
वेदांत और उनके परिवार ने कॉपी में मौजूद हैंडराइटिंग देखकर यह दावा किया कि यह किसी दूसरे स्टूडेंट की कॉपी है। उनकी पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और लाखों लोगों तक पहुंची।
इसके बाद ढेरों स्टूडेंट्स ने इसी तरह के मिलते-जुलते आरोप लगाए। किसी ने कहा कि उन्हें किसी और की आंसर शीट दिखाई गई तो किसी ने अपनी आंसर शीट न दिखाई देने की बात कही। किसी ने यह कहा कि उन्हें सब कुछ धुंधला दिख रहा है तो किसी ने पूरा पेज खाली दिखाई देने के स्क्रीनशॉट शेयर किए।
CBSE ने बाद में कुछ मामलों में स्टूडेंट्स से कॉन्टैक्ट किया और उनकी सही आंसर शीट अपलोड की, लेकिन तब तक सवाल उठ चुका था कि आखिर ऐसी गलती हुई कैसे?

फिर निसर्ग ने पोर्टल की सुरक्षा पर सवाल उठाए
विवाद का दूसरा बड़ा मोड़ तब आया जब 12वीं के स्टूडेंट और शौकिया साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर निसर्ग अधिकारी ने दावा किया कि उन्होंने CBSE के OSM पोर्टल में कई गंभीर सुरक्षा खामियां खोजी हैं।
निसर्ग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि पोर्टल में ऐसी कमजोरियां हैं जिनकी मदद से हर इंफोर्मेशन तक पहुंच बनाई जा सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आंसर शीट्स और क्वेश्चन पेपर्स में भी छेड़छाड़ पॉसिबल है।
उन्होंने कुछ तस्वीरें शेयर कर यह सवाल भी उठाया कि क्या आंसर शीट्स को हाई-क्वालिटी स्कैनर से स्कैन करने के बजाय मोबाइल फोन से फोटो खींचकर अपलोड किया गया था।
शुरुआत में CBSE ने इन दावों को खारिज किया, लेकिन बाद में बोर्ड ने माना कि पोर्टल में कुछ तकनीकी खामियां थीं और उन्हें ठीक करने का काम शुरू कर दिया गया है।

सार्थक ने टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल
इसके बाद झारखंड के छात्र सार्थक सिद्धांत ने मामले की पड़ताल शुरू की। उन्होंने CBSE के अलग-अलग टेंडर डॉक्यूमेंट्स की तुलना कर दावा किया कि OSM सिस्टम से जुड़े टेंडरों में कई बदलाव किए गए। सार्थक ने आरोप लगाया कि सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए यह किया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि शुरुआती टेंडर हटाए गए, बाद में तकनीकी इवैल्यूएशन में सभी बोली लगाने वाली कंपनियों को अयोग्य बताया गया और फिर संशोधित शर्तों के साथ नया ठेका दिया गया।
हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इनके बाद CBSE की पूरी प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े हो गए।

CBSE को आखिर क्यों माननी पड़ी खामियां?
शुरुआत में बोर्ड ने कई आरोपों को गलत बताया। लेकिन जैसे-जैसे स्टूडेंट्स की शिकायतें बढ़ीं और तकनीकी जानकारी सार्वजनिक हुई, मामला गंभीर होता गया।
आखिरकार CBSE ने माना कि उसके सर्विस प्रोवाइडर के OnMark पोर्टल में खामियां थीं। हालांकि बोर्ड का कहना है कि इन समस्याओं को दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
अब आगे क्या होगा?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मामले की जांच में IIT मद्रास, IIT कानपुर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के एक्सपर्ट को शामिल किया गया है।
ये टीमें पोर्टल की सेफ्टी, आंसर शीट्स के डिजिटाइजेशन की प्रोसेस और पूरे सिस्टम की तकनीकी जांच कर रही हैं। पोर्टल और पेमेंट गेटवे को और सेफ बनाने पर भी काम चल रहा है।
CBSE का कहना है कि स्टूडेंट्स की शिकायतों को प्रायोरिटी के आधार पर निपटाया जा रहा है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
यह भी पढ़ें...

