सड्डू में फैक्ट्रियों के धुएं से 3 हजार लोग परेशान: घरों में जम रही काली धूल, बच्चों-बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ; प्रशासन ने जांच का दिया आश्वासन
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रायपुर के सड्डू में जहरीले धुएं का कहर, 3000 लोगों की सांसों पर संकट
रायपुर। राजधानी के सड्डू स्थित बंजर पारा में फैक्ट्रियों से निकलने वाले काले धुएं और उड़ती धूल से करीब 3000 लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रिहायशी बस्ती के बीच चल रही फैक्ट्रियों से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। घरों में काली धूल जम रही है और लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। मामले में नगर निगम की महापौर मीनल चौबे और कमिश्नर संबित मिश्रा ने जांच कराने का आश्वासन दिया है।
3000 की आबादी के बीच चल रहीं फैक्ट्रियां
सड्डू के बंजर पारा में करीब 400 मकान हैं, जहां लगभग 3000 लोग रहते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले 40 साल से इस इलाके में रह रहे हैं। आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से बस्ती के बीच दो से तीन फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। रहवासियों के मुताबिक, इन फैक्ट्रियों से दिन-रात काला धुआं निकलता है और धूल उड़ती रहती है। घरों की छतों, कपड़ों और खाने-पीने के सामान पर काली धूल जम जाती है। इससे लोगों को अपने ही घरों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्रियों के धुएं और धूल के कारण बच्चों, बुजुर्गों और अन्य रहवासियों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि प्रदूषण के कारण उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्हें डर है कि लंबे समय तक ऐसी हवा में रहने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, इन शिकायतों और बीमारियों के कारणों की पुष्टि के लिए स्वास्थ्य जांच और प्रदूषण की वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
पर्यावरण विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
प्रदूषण को लेकर पर्यावरण विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उद्योगों से निकलने वाले धुएं की नियमित निगरानी होती है, तो रिहायशी इलाके में इस तरह की स्थिति कैसे बनी हुई है? लोग चाहते हैं कि संबंधित विभा की जांच करे और यह पता लगाए कि वहां पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। साथ ही, जरूरत के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण के उपाय किए जाएं।

रिहायशी इलाके में फैक्ट्रियां कैसे शुरू हुईं?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि घनी आबादी वाली बस्ती के बीच फैक्ट्रियां संचालित करने की अनुमति कैसे मिली। क्या इन इकाइयों के पास जरूरी अनुमतियां हैं? क्या इनके संचालन की नियमित जांच की गई? नगर निगम और पर्यावरण विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की है? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। यह भी देखना होगा कि फैक्ट्रियों की स्थापना और संचालन के दौरान लागू भूमि उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन किया गया या नहीं।
राज एक्सप्रेस ने अधिकारियों के सामने उठाया मामला
राज एक्सप्रेस ने जनहित से जुड़े इस मामले को प्रमुखता से उठाया और नगर निगम के अधिकारियों के संज्ञान में लाया। नगर निगम कमिश्नर संबित मिश्रा ने कहा कि मामले की जानकारी लेकर संबंधित विभाग को सूचित किया जाएगा और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों के तहत जांच करवाई जाएगी। वहीं, महापौर मीनल चौबे ने भी मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि रिहायशी इलाके में व्यावसायिक फैक्ट्रियां संचालित नहीं होने दी जाएंगी।
अब कार्रवाई का इंतजार
बंजर पारा के रहवासी अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि जांच में प्रदूषण की स्थिति और फैक्ट्रियों के संचालन से जुड़े नियमों की वास्तविकता सामने आएगी। अब देखना होगा कि नगर निगम और संबंधित विभाग कब तक जांच पूरी करते हैं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर क्या कदम उठाए जाते हैं। सबसे अहम सवाल यही है कि बस्ती में रहने वाले करीब 3000 लोगों को प्रदूषण से राहत कब मिलेगी।
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संबित मिश्रा, निगम कमिश्नर
मीनल चौबे, मेयर रायपुर
संदीप कुमार, पीड़ित

