अंधविश्वास का शिकार बना होनहार छात्र: रायपुर प्रयास विद्यालय में 9वीं के बच्चे पर 'तंत्र-मंत्र' का आरोप, टीसी देकर निकाला; बाल संरक्षण आयोग सख्त
Published:
4 min read

पिता बोले- मुझसे जबरन कागज पर दस्तखत कराए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जहां नक्सल प्रभावित और गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रयास योजना चला रही है। वहीं उसी प्रयास विद्यालय, सड्डू रायपुर से एक ऐसी दिल दहला देने वाली कहानी सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। 9वीं कक्षा के एक मासूम छात्र पर तंत्र विद्या जाहिर होने का अजीबो-गरीब आरोप लगाकर उसे स्कूल से निकाल दिया गया। वो भी उसके माता-पिता को बिना कुछ बताए।
क्या है पूरा मामला?
महासमुंद जिले के पतेवा थाना क्षेत्र के ग्राम बम्बूरडीह (रामाडबरी) के रहने वाले संजय कुमार भारती ने बाल संरक्षण आयोग को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। संजय बताते हैं कि उनका बेटा आयुष भारती पढ़ाई में होनहार है। उसने प्रयास परीक्षा पास की और बड़े सपनों के साथ कक्षा 9वीं के लिए प्रयास विद्यालय सड्डू, रायपुर में उसका दाखिला हुआ था। गरीब परिवार के लिए ये किसी सपने के पूरा होने जैसा था,लेकिन कुछ ही दिन बाद प्राचार्य और अधीक्षक ने आयुष पर तंत्र विद्या जानने का आरोप लगा दिया। पिता का आरोप है कि बिना उन्हें सूचना दिए, बिना कोई कारण बताए, स्कूल प्रबंधन ने उनके बेटे को कक्षा 9वीं से ट्रांसफर सर्टिफिकेट TC थमा कर बाहर निकाल दिया।
बाल संरक्षण आयोग का सख्त रुख
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग के 3 बड़े निर्देश TC निरस्त करो छात्र की जारी की गई TC को तत्काल निरस्त कर उसकी पढ़ाई दोबारा शुरू कराई जाए, ताकि किसी भी हाल में उसकी शिक्षा बाधित न हो। जांच के आदेश सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास रायपुर को पूरे मामले की विस्तृत और तथ्यात्मक जांच कर लिखित प्रतिवेदन आयोग में पेश करने को कहा गया है। डॉ. वर्णिका ने खुद फोन पर चर्चा कर निर्देश दिए।
तंत्र-क्रिया का आरोप लगाकर स्कूल से निकाला
प्राचार्य तलब प्रयास विद्यालय के प्राचार्य और अधीक्षक को 21 सितंबर को दोपहर 2 बजे आयोग की आपातकालीन खंडपीठ में सभी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि छात्र के पिता संजय कुमार भारती ने आरोप लगाया था कि बिना जानकारी दिए उनके बेटे पर तंत्र-क्रिया का आरोप लगाकर उसे स्कूल से निकाल दिया गया और कम पढ़ा-लिखा होने के कारण उनसे जबरदस्ती कागज पर हस्ताक्षर भी करा लिए गए।आयोग ने स्पष्ट कहा है कि आरोप की कोई पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम निराकरण तक छात्र की पढ़ाई निर्बाध जारी रखी जाए। मामले में आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 13(1)(ज) एवं 14 के तहत संज्ञान लिया है।
कम पढ़े-लिखे पिता से जबरदस्ती साइन?
इससे भी ज्यादा चौकानें वाली बात पिता ने अपनी चिट्ठी में लिखी है। संजय कुमार ने लिखा है - मैं कम पढ़ा-लिखा हूँ। प्राचार्य ने अपने बचाव के लिए दबाव पूर्वक मुझसे किसी कागज पर हस्ताक्षर करा लिया। उस आवेदन में क्या लिखा था, वो मेरे समझ में नहीं आया।एक पिता जो अपने बेटे को कलेक्टर बनाने का सपना देखकर रायपुर भेजता है, उसी पिता को आज अपने ही बेटे के निष्कासन के कागज पर अनजाने में दस्तखत करना पड़ा। सोचिए उस पिता के दिल पर क्या बीत रही होगी?
पिता ने जांच कराने की मांग की
बेबस पिता ने अब सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की सूक्ष्म जांच की जाए और प्रयास विद्यालय सड्डू के प्राचार्य एवं अधीक्षक के विरुद्ध उचित कार्यवाही की जाए।
सवाल कई हैं
क्या 9वीं क्लास के बच्चे पर तंत्र-मंत्र का आरोप लगाकर उसका भविष्य बर्बाद करना उचित है? क्या एक आदिवासी और गरीब परिवार के बच्चे को बिना पालक को बताए स्कूल से निकाल देना प्रयास योजना के मकसद को ही खत्म नहीं करता? क्या उस कागज पर जबरदस्ती हस्ताक्षर कराना दबाव नहीं है? ये सिर्फ आयुष की कहानी नहीं है, ये उन सैकड़ों गरीब बच्चों के भरोसे की कहानी है जो प्रयास जैसी योजना को अपनी जिंदगी की आखिरी उम्मीद मानते हैं।
विभाग को पता नहीं
शिक्षा विभाग हो या सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास रायपुर इतनें गंभीर मामले की जानकारी नहीं थी। जब बाल संरक्षण आयोग ने मामले को संज्ञान में लिया तब जाकर विभाग की आंखे खुली।
ये भी पढ़ें- मुरैना में अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान: कई गांवों के किसानों ने सर्वे और मुआवजे के लिए प्रशासन से लगाई गुहार

