वेज थाली 10% महंगी हुई: प्याज, चावल और तेल के दाम बढ़ने का असर; नॉन-वेज थाली का प्राइस सिर्फ 6% बढ़ा
Published:
4 min read

घर पर वेजीटेरियन थाली तैयार करने की अनुमानित लागत सितंबर में बढ़कर 30.80 रुपए हो गई है। (AI इमेज)
बिजनेस डेस्क। घर पर बना वेजीटेरियन खाना (शाकाहारी खाना), नॉन-वेजीटेरियन खाने (मांसाहारी खाना) की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से महंगा हो रहा है। प्याज की कीमतों में तेज उछाल के साथ चावल, खाने के तेल और रसोई गैस की बढ़ते दाम ने खर्च का बोझ और बढ़ा दिया है।
CRISIL Intelligence (क्रिसिल इंटेलिजेंस) की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में वेजीटेरियन थाली की लागत में सालाना आधार पर 10% की बढ़ोतरी हुई। जबकि नॉन-वेजीटेरियन थाली की लागत में 6% की वृद्धि देखी गई।
घर पर वेजीटेरियन थाली तैयार करने की अनुमानित लागत सितंबर में बढ़कर 30.80 रुपए हो गई है। ये एक साल पहले 28.10 रुपए थी। इसी अवधि में नॉन-वेजीटेरियन थाली की लागत 56 रुपए से बढ़कर 59.50 रुपए हो गई।

किन वजहों से दोनों थाली में अतंर रहा
जब हम थाली में इस्तेमाल होने वाली चीजों को अलग-अलग करके देखेंगे हैं, तो यह अंतर और भी साफ हो जाएगा। सितंबर में प्याज की कीमत पिछले साल के मुकाबले 89% बढ़कर 53 रुपए प्रति किलो हो गई। वहीं चावल की कीमतों में 8%, वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में 12% और LPG की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी हुई।
दूसरी तरफ नॉन-वेज थाली में मुख्य प्रोटीन यानी चिकन (ब्रॉयलर) के दाम सिर्फ 2% ही बढ़े। ये थाली की कुल कीमत का करीब आधार हिस्सा होता है। इसी वजह से नॉन-वेज थाली की कीमत में बढ़ोतरी कम रही।
प्याज ने वेजीटेरियन थाली की कीमत बढ़ाई
वेजीटेरियन थाली की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह प्याज रही है। CRISIL के मुताबिक रबी प्याज के प्रोडक्शन में अनुमानित 5-6% की गिरावट के कारण इसकी सप्लाई कम हुई और इस वजह से दाम बढ़ गए।
जून में बारिश औसत से लगभग 40% कम रही। इसके चलते खरीफ प्याज की ट्रांसप्लांटिंग (रोपाई) में देरी हुई और बाजार में नई फसल के आने में भी काफी समय लगा। सीजनल डिमांड ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है।

चावल और ऑयल के दाम का भी असर रहा
चावल भी महंगे हो गए हैं। कम बुवाई और कम पैदावार के कारण धान के उत्पादन में 5-6% की गिरावट की आशंका रही और सितंबर में चावल की कीमतों में सालाना आधार पर 8% की बढ़ोतरी हुई। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और ग्लोबल पाम ऑयल प्रोडक्शन पर अल नीनो के असर को लेकर टेंशन के कारण वेजिटेबल ऑयल की कीमत 12% बढ़ी।
ग्लोबल लेवल पर सप्लाई में दिक्कतों के कारण LPG की कीमतें भी पिछले साल के मुकाबले 10% ज्यादा रहीं। इससे घर पर खाना पकाने का खर्च बढ़ गया है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि सब्जियों से लेकर अनाज, तेल और रसोई गैस जैसी जरूरी चीजें महंगी हो गई हैं। इसी वजह से पूरी थाली तैयार करने की लागत काफी बढ़ गई।

नॉन-वेज थाली पर ज्यादा असर क्यों नहीं
नॉन-वेज थाली की कीमत में धीमी बढ़ोतरी का मुख्य कारण ब्रॉयलर की कीमतें हैं। थाली की कुल लागत में करीब आधा हिस्सा चिकन का होता है, लेकिन सितंबर में ब्रॉयलर की कीमतों में सालाना आधार पर केवल 2% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि नॉन-वेज खाना सस्ता है। सितंबर में नॉन-वेज थाली की अनुमानित कीमत 59.50 रुपए थी, जो वेज थाली से लगभग दोगुनी है। फर्क सिर्फ इतना है कि पिछले एक साल में इसकी कीमत बढ़ने की रफ्तार धीमी रही है।
आगे क्या स्थिति रह सकती है
खाने के खर्च में तुरंत कमी आएगी या नहीं यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मंडियों में प्याज के दाम कम होते हैं या नहीं।
- रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का मानना है कि अक्टूबर के आखिर तक प्याज की कीमतें कम हो सकती हैं। हालांकि त्योहारों और सीजन की मांग के कारण थोड़े समय के लिए ये ऊंची रह सकती हैं।
- अगर प्याज के दाम गिरते हैं तो वेज थाली की कीमत में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि महंगाई को लेकर पूरी स्थिति अभी भी साफ नहीं है।
- चावल, खाना पकाने का तेल और LPG सिलेंडर भी पिछले साल के मुकाबले महंगे हो गए हैं, जिससे घर के खाने का बजट प्रभावित होता रहेगा।
- इस तुलना से पता चलता है कि महंगाई का असर हर तरह के खाने पर एक जैसा नहीं पड़ता।
- सितंबर के महीने में प्याज और रसोई की दूसरी जरूरी चीजों के तेजी से महंगे होने की वजह से शाकाहारी थाली की लागत बहुत जल्दी बढ़ गई।

