फेस्टिव सीजन में ज्यादा खर्च नहीं कर पा रहे लोग: सर्वे रिपोर्ट में दावा- 53% परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ी, गांव में हालात और खराब
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गांव के 59.2% लोगों ने सर्वे में बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है। (AI इमेज)
बिजनेस डेस्क। आने वाले फेस्टिव सीजन में भारतीय कंज्यूमर्स खरीदारी, खर्च और ट्रैवल करने के लिए एक्साइटेड हैं। हालांकि, फाइनेंशियल कैपेसिटी की वजह से लोग महंगे और बड़े सामानों पर ज्यादा खर्च नहीं कर पा रहे हैं। ये हाल ही में हुए सी-वोटर (CVoter) की सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है। सेंटर फॉर वोटिंग ओपिनियंस एंड ट्रेंड्स इन इलेक्शन रिसर्च (CVoter) एक भारतीय अंतरराष्ट्रीय पोलिंग एजेंसी है। इसका मुख्यालय दिल्ली में है।
सी-वोटर स्नैप पोल के मुताबिक, कम इनकम वाले परिवार अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर काफी परेशान हैं, जबकि ज्यादा इनकम वाले परिवारों में अभी भी फेस्टिव सीजन में खरीदारी को लेकर एक्साइटमेंट है।
53% परिवारों की स्थिति खराब
सर्वे में पता चला कि भारतीय परिवारों में आर्थिक तंगी की चिंता काफी ज्यादा है। सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा यानी 53.6% लोगों ने माना कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति एक साल पहले के मुकाबले और खराब हुई है। सिर्फ 11.6% लोगों ने कहा कि उनकी स्थिति सुधरी है, जबकि 27.1% लोगों की हालत जैसी पहले थी वैसी ही है।
सी-वोटर का ये सर्वे 28 और 29 सितंबर 2026 को 2,051 लोगों के बीच किया गया था। इसमें लोगों की फेस्टिव सीजन के दौरान खरीदारी, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान, गाड़ियां, गहने, होम रेनोवेशन, ट्रैवल से जुड़े खर्च को लेकर बातचीत की गई थी।

शहर-गांव में क्या स्थिति
इस सर्वे में शहर और गांव के बीच का अंतर भी साफ नजर आता है। जहां शहरों के 40.6% लोगों ने अपनी आर्थिक स्थिति बिगड़ने की बात कही, वहीं गांवों में यह आंकड़ा बढ़कर 59.2% तक पहुंच गया। कम आय वाले परिवारों पर इसकी सबसे ज्यादा मार पड़ी है। लोअर इनकम ग्रुप (कम आय वाले वर्ग) के 63.2% लोगों ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ी है, जबकि हाई इनकम ग्रुप (ज्यादा आय वाले वर्ग) में ऐसे लोग सिर्फ 26.3% हैं।
आगे भी कुछ खास उम्मीदें नहीं
आने वाले साल को लेकर भी लोगों के मन में कोई खास उम्मीद नहीं दिख रही है। सिर्फ 24.4% लोगों का मानना है कि उनके परिवार की स्थिति बेहतर होगी, जबकि 38% लोगों को डर है कि हालत और बिगड़ेगी। इसके अलावा 24% लोगों को लगता है कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा और 13.6% लोगों को खुद भी साफ तौर पर समझ नहीं आ रहा है कि आने वाले साल में उनकी आर्थिक स्थिति कैसी रहेगी।

