कमजोर मानसून पर एक और डराने वाली रिपोर्ट: रूरल इकोनॉमी खतरे में, इनकम-डिमांड घट सकती है, महंगाई बढ़ने के आसार; S&P की रिपोर्ट में क्या-क्या
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इस साल जून में सामान्य से करीब 40 फीसदी कम बारिश हुई है। जुलाई में भी कम बारिश होने का पूर्वानुमान है। (फोटो सोर्स: ANI)
नेशनल डेस्क। सामान्य से कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की रूरल इकोनॉमी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इससे किसानों की इनकम घट सकती है और महंगाई बढ़ सकती है। ग्रामीण इलाकों में कंजम्प्शन की रफ्तार भी धीमी पड़ने के आसार हैं।
यह दावे S&P Global Ratings की लेटेस्ट रिपोर्ट में सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एग्रीकल्चर और उससे जुड़े सेक्टर जैसे एग्रोकेमिकल्स, ट्रैक्टर, टू-व्हीलर और माइक्रोफाइनेंस इंस्टिट्यूट पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है।
किसानों की आय घटेगी, गांवों में डिमांड पर असर पड़ेगा
S&P Global Ratings ने कहा कि पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलों की पैदावार कम हो सकती है, जिससे किसानों की इनकम घटेगी। किसानों की आय कम होने का सीधा असर ग्रामीण बाजारों में मांग पर पड़ेगा। ट्रैक्टर और दोपहिया वाहन से लेकर कई चीजों बिक्री में कमी आएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि गांवों में लोगों के पास इन्हें खरीदने के लिए पैसा कम होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर मानसून के कारण एग्रीकल्चर प्रोडक्शन घटेगा, जिससे खाने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। अगर लंबे वक्त तक बारिश की कमी बनी रहती है तो सरकार को किसानों और ग्रामीण इलाकों के लिए सहायता पैकेज देने पड़ सकते हैं, जिससे सरकार का फाइनेंशियल बर्डन भी बढ़ सकता है।

जून में 39.8% कम बारिश, जुलाई का अनुमान भी कमजोर
मानसून के हाल इस बार शुरू से ही डराने वाले रहे हैं। जून में भारत में सामान्य से 39.8 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। भारत के मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया है।
हालांकि जुलाई की शुरुआत में पश्चिमी तटों पर अच्छी बारिश से कुछ राहत मिली है लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे मौसम शुष्क रहने के ही आसार बने हुए हैं। दरअसल, अगले दो हफ्ते तक मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) मानसून को मजबूत करने की स्थिति में नहीं है। साथ ही कम दबाव वाले सिस्टम बनने की संभावना भी कम है। इसके चलते महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।
भारत के लिए मानसून इतना अहम क्यों?
भारत में सालाना बारिश का करीब 70 फीसदी हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से आता है। देश की लगभग आधी खेती अब भी सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर है। ऐसे में मानसून की कमजोरी सीधे खेती और रूरल इकोनॉमी को प्रभावित करती है।
मानसून की अहमियत इसी बात से लगा सकते हैं कि इस बार बारिश में देरी हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई पर फौरन असर दिख गया। एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, 5 जुलाई तक किसानों ने लगभग 3.5 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई की, जो पिछले साल की तुलना में 21 फीसदी कम है। इसका असर खास तौर पर धान, कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों पर पड़ा है।

माइक्रोफाइनेंस पर असर, इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन घटेगा
S&P Global Ratings का कहना है कि कमजोर मानसून का असर फाइनेंस फील्ड पर भी पड़ सकता है। ग्रामीण इलाकों में इनकम में कमी आने से माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFI) पर जोखिम ज्यादा रहेगा क्योंकि उनका बड़ा हिस्सा ग्रामीण ग्राहकों पर निर्भर है। बैंकों पर भी इसका कई तरह से असर होगा, लेकिन सीमित रहेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कमजोर मानसून की स्थिति में देश में हाइड्रोपावर उत्पादन 10 से 15 फीसदी तक घट सकता है।
सरकार की किसानों को सलाह
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कम बारिश वाले इलाकों के किसानों को कम वक्त में तैयार होने वाली और कम पानी में उगने वाली फसलें जैसे मक्का, बाजरा और मूंग बोने की सलाह दी है ताकि बारिश में देरी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

