हाइलाइट्स –
कोयले के स्वर्णिम दिन!
विद्युत उत्पादन रफ्तार मंद
कोयला नहीं तो बिजली नहीं
प्लांट्स में बहुत कम कोयला शेष
राज एक्सप्रेस (Raj Express)। COVID-19 जैसी महामारी का दुनिया में प्रसार करने के बाद अब चीन के कारण कोयले से बिजली उत्पादन पर निर्भर देशों में गंभीर बिजली संकट का खतरा मंडरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोयले के मूल्य में लगी आग से मांग और आपूर्ति का गणित गड़बड़ाने के कारण कोरोना वायरस महामारी प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं को दूसरी बड़ी चोट लगी है।
चीन में बिजली उत्पादन संयंत्रों/उपभोक्ता वस्तु निर्माण इकाइयों में ईंधन/बिजली किल्लत (Energy/Electricity Crisis) से कोरोना प्रभावित चीन की अर्थव्यवस्था की गति मंद हो रही है।
चीन में ईंधन संकट के कारण जो हालात हैं कमोबेश वही हालात भारत में भी पैदा हो सकते हैं। चीन में बिजली उत्पादन की कोयले पर अतिनिर्भरता और उसके अधिक दाम जैसी तमाम परेशानियां पैदा हुई हैं। इस मामले में भारत को ईंधन/बिजली की कमी की स्थिति गंभीर होने के पहले से वो इंतजाम करने होंगे जो चीन में परेशानी का सबब बन रहे हैं।
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भारत में सतर्कता -
Energy/Electricity Crisis: ऊर्जा/बिजली संकट में चीन जैसे हालात से बचने भारत सतर्कता बरत रहा है। साल में एक बार होने वाली विभागीय बैठकों की परंपरा टूट गई है और राज्यों में सप्ताह में दो दफा मीटिंग हो रही है!
चीन में स्थिति गंभीर -
चीन का कुल 70 फीसद बिजली उत्पादन कोयले पर निर्भर है। यहां कोयले की कमी के कारण बिजली संकट व्याप्त है। बिजली की कमी से चीन में उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। भारत को इस मोर्चे पर खास सतर्क रहना होगा, क्योंकि देश का विद्युत उत्पादन तरीका कुछ इसी तर्ज पर है।
कोरोना वायरस महामारी से जूझने के बाद पटरी पर लौटने वाली वैश्विक अर्थव्यवस्था चीन में बिजली संकट के कारण नुकसान की आशंका जताई गई है। इस संकट की मूल वजह कोयले पर चीन की अति निर्भरता को माना जा रहा है।
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भारत के लिए चेतावनी -
चीन में कई दशकों बाद छाया बिजली संकट ऐन कोरोना महामारी संकट के वक्त आया है। इस संकट से चीन की उत्पाद निर्माण एवं आपूर्ति श्रृंखला का दुष्प्रभाव चीन की पूरी सप्लाई चेन पर पड़ा है। चीन के हालात भारत के लिए संकेत हैं क्योंकि क्योंकि देश भी कोरोना त्रासदी झेल रहा है।
चीन की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से समूची दुनिया में खाद्यान्न कीमत पर दबाव पड़ने की अनुमानित आशंका है। चीन की विदेश नीति पर आधारित एक रिपोर्ट में चीन में पैदा हुए बिजली संकट की वजह सरकार की नीतियों को बताया गया है।
चीन की गलती –
रिपोर्ट में उल्लेखित है कि चीन ने नीतिगत स्तर पर गलत फैसले लिए। कोविड-19 (COVID-19) महामारी की शुरुआत में भी चीन के नीति निर्माता इसके मार्केट पर पड़ने वाले असर को नहीं भांप पाए।
औद्योगिक उत्पादन में गिरावट -
अब हाल ही में अप्रत्याशित रूप से छाए बिजली संकट के कारण सितंबर में चीन के औद्योगिक उत्पादन में गिरावट दर्ज हुई। उल्लेखनीय है कि कोरोना जनित पाबंदियों के हटने के बाद पहली बार चीन के उत्पादन में गिरावट दर्ज हुई है।
भारत में औद्योगिक इकाइयां कोरोना जनित लॉकडाउन के बाद अभी बहाली की स्थिति में हैं यदि बिजली संकट गहराता है तो मांग और आपूर्ति फिर प्रभावित होगी।
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कोयले का अंतरराष्ट्रीय मूल्य -
दरअसल कोयला आपूर्ति में इन दिनों इंटरनेशनल मार्केट का खासा दखल है। चीन में बिजली उत्पादकों को चुकाने वाली कीमत सरकार तय करती है, लेकिन कोयला कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में तय होती है।
कोरोना महामारी जनित विभीषिका के बाद दुनिया भर की औद्योगिक इकाइयों में काम के गति पकड़ने से बिजली की भी मांग बढ़ी। इससे कोयला पर निर्भर बिजली बनाने वाले संयत्रों में कोयले की डिमांड बढ़ने से इंटरनेशनल लेवल पर कोल प्राइज में भी तेजी से उछाल आया।
चीन की नीतियां -
चीन सरकार की नीतियों के कारण महंगा कोयला खरीदकर घाटे में बिजली बेचना बिजली उत्पादक संयंत्रों के लिए संभव नहीं हो पा रहा। ऐसे में यहां कई संयंत्र तकनीकी खराबी बताकर या फिर कोल पर्चेसिंग में असमर्थता व्यक्त कर बिजली प्रोडक्शन में कमी ला रहे हैं।
संयंत्रों के इस कदम के कारण ही चीन में कम बिजली आपूर्ति के हालात पैदा हुए हैं। आपको बता दें चीन में कुल उत्पादित बिजली में से 70 प्रतिशत बिजली का उत्पादन कोयले पर निर्भर है।
भारत सरकार की नीतियां -
भारत सरकार ने इस दिशा में हालांकि कुछ ठोस कदम उठाए हैं। भारत में बजट के दौरान छोटे, मझौले उद्योगों के साथ ही बड़े उद्योगों के लिए भी खास आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई है।
कोरोना प्रभावित उद्योग धंधों के लिए करों में रियायत दी गई है। हालांकि मामला बिजली का है तो सरकारों को उद्योग धंधे सुचारू चलें इसलिए इंडस्ट्री को बिजली की रियायती दर पर आपूर्ति सुलभ कराना होगी। उद्योग एवं व्यापार संगठन भी इस बात की पैरवी कर रहे हैं।
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इन उद्योगों पर प्रभाव -
हालांकि बिजली की जरूरत सभी उद्योगों को होती है। आज के तकनीकी दौर में बिन बिजली सब सून है। फिर भी बिजली की कमी के कारण टेक्नोलॉजी, कागज, खाद्य प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर खास असर पड़ा है।
बिजली बचाने की आदत डालिए नहीं तो महंगाई के लिए तैयार रहिये क्योंकि वो असर दिखाने तैयार है।
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डिस्क्लेमर – आर्टिकल प्रचलित रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें शीर्षक-उप शीर्षक और संबंधित अतिरिक्त प्रचलित जानकारी जोड़ी गई हैं। इस आर्टिकल में प्रकाशित तथ्यों की जिम्मेदारी राज एक्सप्रेस की नहीं होगी।
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